लेबनान में इज़रायल की बमबारी ने बढ़ाया तनाव और सीज़फायर की धज्जियां उड़ा दीं

लेबनान में इज़रायल की बमबारी ने बढ़ाया तनाव और सीज़फायर की धज्जियां उड़ा दीं

इज़रायल और लेबनान के बीच का संघर्ष फिर से उस मोड़ पर आ गया है जहाँ शांति की हर कोशिश बेमानी लगने लगी है। लेबनान में हालिया बमबारी ने साफ कर दिया है कि कागजों पर लिखे गए सीज़फायर समझौतों की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जब आसमान से मिसाइलें बरसती हैं, तो कूटनीति के मेज पर बैठे लोग भी खामोश हो जाते हैं। इज़रायल का कहना है कि वो अपनी सुरक्षा के लिए ये कदम उठा रहा है, लेकिन लेबनान की धरती पर गिरते ये बम उस सीज़फायर को तार-तार कर चुके हैं जिसका इंतजार लाखों लोग कर रहे थे।

सीज़फायर के नाम पर इज़रायल का दोहरा खेल

ये कोई पहली बार नहीं है जब शांति के वादों के बीच धमाकों की गूंज सुनाई दी हो। इज़रायल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में जो ताजा हमले किए हैं, वो सीधे तौर पर उस भरोसे पर चोट हैं जो अंतरराष्ट्रीय बिरादरी बनाने की कोशिश कर रही थी। इज़रायली रक्षा बलों (IDF) का तर्क है कि हिजबुल्लाह की गतिविधियों को रोकने के लिए ये प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक्स जरूरी हैं। लेकिन क्या एक संप्रभु राष्ट्र पर इस तरह हमला करना सीज़फायर की शर्तों का उल्लंघन नहीं है?

ईमानदारी से कहूं तो ये एक ऐसा चक्र है जो कभी खत्म होता नहीं दिखता। एक तरफ युद्ध विराम की बातें होती हैं, दूसरी तरफ फाइटर जेट्स को हमले के आदेश दिए जाते हैं। लेबनान का स्वास्थ्य मंत्रालय पुष्टि कर चुका है कि इन हमलों में नागरिक इलाकों को भी निशाना बनाया गया। जब आप रिहायशी बस्तियों के पास बम गिराते हैं, तो उसे 'टार्गेटेड ऑपरेशन' कहना सिर्फ एक बहाना लगता है। इज़रायल की ये आक्रामक नीति मध्य पूर्व में आग को बुझाने के बजाय उसमें घी डालने का काम कर रही है।

लेबनान की तबाही और अंतरराष्ट्रीय चुप्पी

लेबनान पहले से ही आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है। वहाँ के लोग बिजली, पानी और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। ऐसे में इज़रायल की बमबारी उनके लिए किसी कयामत से कम नहीं है। बेरूत से लेकर टायर तक, हर जगह दहशत का माहौल है। संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देश अक्सर ऐसी घटनाओं पर सिर्फ 'चिंता' जताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या चिंता जताने से गिरती हुई इमारतें रुक जाएंगी?

इज़रायल का दावा है कि हिजबुल्लाह इन इलाकों का इस्तेमाल रॉकेट लॉन्च पैड के तौर पर कर रहा है। हो सकता है इसमें कुछ सच्चाई हो, लेकिन इसकी सजा पूरे लेबनान को देना कहाँ का इंसाफ है? युद्ध के भी कुछ नियम होते हैं। जब आप बिना किसी चेतावनी के रिहायशी इलाकों के ऊपर से मिसाइलें गुजारते हैं, तो आप सिर्फ दुश्मन को नहीं मार रहे होते, आप एक पूरी नस्ल के मन में नफरत के बीज बो रहे होते हैं। इज़रायल की ये रणनीति लॉन्ग टर्म में उसके खुद के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती है।

हिजबुल्लाह का पलटवार और बढ़ता खतरा

इज़रायल के इन हमलों के बाद हिजबुल्लाह भी शांत नहीं बैठने वाला। लेबनान से होने वाले जवाबी हमलों ने इज़रायल के उत्तरी शहरों में भी सायरन बजवा दिए हैं। ये एक ऐसी जंग है जिसमें कोई नहीं जीतता। हिजबुल्लाह के पास जो मिसाइल तकनीक है, वो इज़रायल के 'आयरन डोम' को भी चुनौती दे रही है। तनाव इतना बढ़ चुका है कि अब छोटी सी चिंगारी भी पूरे इलाके को बड़े युद्ध में झोंक सकती है।

सीज़फायर की शर्तों में साफ लिखा था कि दोनों पक्ष अपनी सीमाओं का सम्मान करेंगे। इज़रायल का कहना है कि उसने सीज़फायर नहीं तोड़ा, बल्कि खतरे को भांपते हुए कार्रवाई की। ये शब्दों की बाजीगरी है। जब आप दूसरे देश की सीमा में घुसकर बम गिराते हैं, तो वो हमला ही कहलाता है, बचाव नहीं। इज़रायल को समझना होगा कि ताकत के दम पर शांति नहीं खरीदी जा सकती।

कूटनीति की नाकामी का सबसे बड़ा उदाहरण

दुनिया भर के नेता न्यूयॉर्क और लंदन में बैठकर शांति की अपील करते हैं। लेकिन हकीकत में जमीन पर कोई भी इज़रायल को रोकने की हिम्मत नहीं दिखा पाता। अमेरिका का समर्थन इज़रायल को वो कवच देता है जिसके पीछे छिपकर वो अपनी मनमर्जी करता है। लेबनान की संप्रभुता का मजाक उड़ाना अब एक आम बात हो गई है। अगर अंतरराष्ट्रीय कानून वाकई वजूद रखते हैं, तो उन्हें यहाँ लागू क्यों नहीं किया जाता?

ये बमबारी सिर्फ इमारतों को नहीं गिरा रही, बल्कि उस भरोसे को भी खत्म कर रही है जो शायद अगली पीढ़ी को शांति से रहने का मौका देता। लेबनान के लोग अब सीज़फायर शब्द से ही नफरत करने लगे हैं क्योंकि उनके लिए इसका मतलब होता है—एक और हमले की तैयारी का समय। इज़रायल ने जिस तरह से सीज़फायर को तार-तार किया है, उसने साबित कर दिया है कि वो शांति समझौते को सिर्फ अपनी सुविधा के हिसाब से इस्तेमाल करता है।

जमीनी हकीकत और आम इंसान का दर्द

कभी उन परिवारों के बारे में सोचिए जो दक्षिण लेबनान में रहते हैं। रात को जब वो सोते हैं, उन्हें नहीं पता होता कि अगली सुबह वो अपने घर की छत देखेंगे या आसमान। इज़रायली ड्रोन की आवाज वहाँ के बच्चों की लोरी बन गई है। ये कोई थ्रिलर फिल्म नहीं है, ये उन लोगों की कड़वी हकीकत है। इज़रायल की सैन्य मशीनरी को शायद ये आंकड़े सिर्फ 'कोलैटरल डैमेज' लगते होंगे, लेकिन ये टूटे हुए सपने और बिखरी हुई जिंदगियां हैं।

हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि लेबनान की सेना इस पूरे मामले में कितनी लाचार है। उनके पास न तो इज़रायल जैसा एयर डिफेंस है और न ही अंतरराष्ट्रीय समर्थन। वो सिर्फ मूकदर्शक बनकर अपनी बर्बादी देख सकते हैं। इज़रायल ने सीज़फायर का उल्लंघन करके ये संदेश दिया है कि वो किसी भी नियम से ऊपर है। ये घमंड अक्सर बड़े संघर्षों की वजह बनता है।

इज़रायल को अपनी सुरक्षा की चिंता करने का पूरा हक है। कोई भी देश अपने नागरिकों पर रॉकेट गिरते नहीं देखना चाहता। लेकिन इसका समाधान पड़ोसी देश को खंडहर बना देना नहीं है। अगर सीज़फायर को बचाना है, तो इज़रायल को अपनी विस्तारवादी और आक्रामक नीति पर लगाम लगानी होगी। लेबनान में की गई ये बमबारी शांति की दिशा में एक बड़ा कदम पीछे है।

अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सिर्फ बयानबाजी छोड़कर ठोस कदम उठाए। इज़रायल पर दबाव बनाना होगा कि वो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का सम्मान करे। लेबनान के निर्दोष लोगों को इस राजनीतिक और सैन्य खींचतान की बलि नहीं चढ़ाया जा सकता। अगर अब भी चुप्पी नहीं टूटी, तो मध्य पूर्व का ये नक्शा खून से और भी ज्यादा लाल हो जाएगा। शांति सिर्फ बातचीत से आती है, बमबारी से नहीं।

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Leah Liu

Leah Liu is a meticulous researcher and eloquent writer, recognized for delivering accurate, insightful content that keeps readers coming back.